गठबंधन टूटेगा या बना रहेगा, इसको लेकर दिन में होगी तस्वीर साफ, लोगों में गठबंधन को लेकर चर्चाओं का बाजार हुआ गर्म
वर्ष 2019 के विधान सभा चुनावों में भाजपा को बहुमत नहीं मिला था, तो ऐसी स्थिति में भाजपा व जन जनता पार्टी का गठनबंधन हुआ और हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन बनी। अब जजपा ने लोकसभा चुनावों में गठबंधन में रहते हुए 10 में से 2 सीटें मांगी तो भाजपा का जजपा को दो सीट देने का मन नहीं बन रहा। इसको लेकर जजपा ने बगावती तेवर दिखा दिए है और गठबंधन तोडऩे का मन बना लिया है।
अगर ऐसा होता है तो हरियाणा की सरकार का गिरना तय हो जाता है। या फिर सभी निर्दलीय विधायकों के सहारे भाजपा सत्ता में बनी भी रह सकती है। पर हिसार के सांसद बृजेंद्र सिंह द्वारा भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ और अब अगर जजपा ने भाजपा का साथ छोड़ दिया तो सूबे में भाजपा की जमकर किरकीरी होगी और इसका असर लोकसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।
भाजपा ऐसा कभी नहीं चाहेगी इस लिए जजपा को मनाने का हर संभव प्रयास करेगी। इसके लिए भाजपा के पास आगामी विधान सभा चुनावों में सीटों के बंटवारे में जजपा को ज्यादा सीटें देने का वादा भी हो सकता है। पर जजपा के नेता चौधरी अजय सिंह चौटाला अपने छोटे बेटे व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला अपने छोटे भाई दिग्विजय सिंह चौटाला को लोकसभा चुनावों में मैदान में उतारकर सांसद में भेजने को ललायित है।
यही वक्त है जब दिग्विजय सिंह चौटाला की राजनीति में धमाकेदार एंट्री भी हो सकती है। उक्त दोनों नेता इस मौके को गंवाना नहीं चाहते इस लिए हिसार या भिवानी से दिग्विजय सिंह चौटाला को मैदान में उतारना चाहते है। इसको लेकर दिल्ली में मंथन भी हुआ पर मामला सिरे न चढऩे के कारण जजपा ने भाजपा को बगावती तेवर दिखा दिए है।
आज यानि मंगलवार को दिन में यह तय हो जाएगा कि भाजपा-जजपा गठबंधन रहेगा या फिर टूटेगा। स्वाभाविक है कि अगर गठबंधन टूटता है तो भापजा को सत्ता में बने रहने के लिए निर्दलीय विधायकों का सहारा लेना पड़ेगा क्योंकि भाजपा के पास 40 विधायक है और सरकार बनाने के लिए 46 विधायकों की जरूरत है। निर्दलीय विधायकों में चौधरी रणजीत सिंह चौटाला पहले से ही भाजपा के साथ है और वे सरकार में मंत्री भी है। बहरहाल अब देखना यह होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।
