विश्व प्रसिद्ध एथलीट और सबसे उम्रदराज मैराथन धावक फौजा सिंह का सड़क हादसे में निधन हो गया।

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114 वर्षीय फौजा सिंह सोमवार सुबह सैर पर गए थे, तभी एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी।

हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल फौजा सिंह को तुरंत जालंधर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई।

हादसे की सूचना मिलते ही जालंधर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और फरार चालक की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की। फौजा सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1911 को पंजाब के जालंधर स्थित ब्यास पिंड में हुआ था।

चार भाई-बहनों में सबसे छोटे फौजा बचपन में शारीरिक रूप से कमजोर थे और पांच साल की उम्र तक चल नहीं पाते थे। लेकिन उन्होंने असाधारण इच्छाशक्ति से इस कमी को अपनी ताकत बनाया। बचपन से ही दौड़ने का शौक रखने वाले फौजा पर 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन ने गहरा प्रभाव डाला।

1992 में पत्नी के निधन के बाद फौजा बेटे के पास लंदन चले गए। वहां उन्होंने अपने दौड़ने के जुनून को फिर से जीवंत किया। नियमित अभ्यास और अटूट समर्पण के बल पर उन्होंने 100 वर्ष की आयु में साल 2011 में टोरंटो मैराथन को 8 घंटे, 11 मिनट और 6 सेकंड में पूरा कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।

वह दुनिया के पहले 100 वर्षीय मैराथन धावक बने, जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने फौजा सिंह के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “महान मैराथन धावक और दृढ़ता के प्रतीक सरदार फौजा सिंह के निधन से अत्यंत दुखी हूं।

114 वर्ष की आयु में वे अद्वितीय उत्साह के साथ ‘नशा मुक्त – रंगला पंजाब‘ मार्च में मेरे साथ शामिल हुए। उनकी विरासत नशा मुक्त पंजाब के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।”

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