हरियाणा के मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि-पर्यटन केंद्र का उद्घाटन किया

कृषि-पर्यटन | Khabrain Hindustan | चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय | मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी |

हरियाणा के मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने गुरुवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) में कृषि-पर्यटन केंद्र (फेज-2) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कृषि और किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा और लोक निर्माण विभाग व सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग मंत्री रणबीर गंगवा भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीआर कम्बोज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

कार्यक्रम में शामिल गणमान्य अतिथि

  • मुख्य अतिथि: मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी
  • विशिष्ट अतिथि: श्याम सिंह राणा और रणबीर गंगवा
  • स्थानीय विधायक: नलवा विधायक रणधीर पनिहार और हांसी विधायक विनोद भायाना

कृषि-पर्यटन केंद्र के उद्देश्यों पर प्रकाश

मुख्यमंत्री नयाब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में बताया कि इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी को मनोरंजन और ज्ञान के साथ जोड़ना है। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रदूषण मुक्त वातावरण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा:

  1. यह केंद्र हरियाणवी संस्कृति, प्राचीन कृषि प्रणाली और कृषि ज्ञान को रोचक तरीके से प्रस्तुत करेगा।
  2. छात्रों को जैव विविधता के बारे में जानने का अनूठा अवसर मिलेगा।

कृषि-पर्यटन केंद्र की प्रमुख विशेषताएं

1. हरियाणवी संस्कृति का केंद्र

कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने बताया कि इस केंद्र में हरियाणवी पुरुषों और महिलाओं के पारंपरिक परिधान, खानपान, त्योहार, लोक संगीत वाद्ययंत्र और पारंपरिक बर्तन की जानकारी दी गई है।

  • भोजन का आनंद: एक फूड कोर्ट बनाया गया है, जहां आगंतुक हरियाणवी पारंपरिक व्यंजन चख सकते हैं।
  • प्रकृति प्रेमियों के लिए ट्री हाउस: पर्यटकों के लिए एक ट्री हाउस बनाया गया है, जहां से वे प्रकृति का अद्भुत नजारा देख सकते हैं।

2. थीम पार्क: अपनी संस्कृति अपनी विरासत

“अपनी संस्कृति अपनी विरासत” नामक थीम पार्क हरियाणवी जीवनशैली, ग्रामीण परिवेश और पारंपरिक कला को दर्शाता है।

  • एक सजावटी जल पूल बनाया गया है, जो आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।
  • पुराने सिंचाई मॉडल का प्रदर्शन: केंद्र में रैहत (पुराने सिंचाई प्रणाली का मॉडल) रखा गया है, जिससे आधुनिक मशीनों के आगमन से पहले की सिंचाई प्रणाली को समझा जा सकता है।

3. बॉटनिकल गार्डन और फिश एक्वेरियम

  • वनस्पति उद्यान: केंद्र में देशी और विदेशी पौधों की प्रजातियों का संग्रह किया गया है।
  • सुनहरी मछलियों का प्रदर्शन: एक सजावटी फिश एक्वेरियम में सुनहरी मछलियों के उत्पादन की जानकारी दी गई है।

फेज-2 में क्या है खास?

कृषि-पर्यटन केंद्र के फेज-2 में विशेष रूप से युवाओं को हरियाणवी संस्कृति से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।

  • बच्चों और छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
  • जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित कार्यक्रम होंगे।

पर्यटन और कृषि के बीच पुल

हरियाणा के इस कृषि-पर्यटन केंद्र ने पारंपरिक कृषि और आधुनिक विज्ञान को एक साथ जोड़ने का एक सफल प्रयास किया है।

  1. पारंपरिक और आधुनिक कृषि का संगम:
    • उन्नत किस्मों और फसलों के बीजों की जानकारी।
    • प्राचीन और नवीनतम कृषि तकनीकों का प्रदर्शन।
  2. ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा:
    • पर्यटकों को हरियाणा की ग्रामीण संस्कृति का अनुभव।
    • स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों का प्रदर्शन।

हरियाणा की संस्कृति का संरक्षण

यह केंद्र न केवल हरियाणा की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने में सहायक होगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिलाएगा।


समाप्ति और भावी योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस केंद्र को और विस्तार दिया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग हरियाणवी संस्कृति और कृषि की विरासत को समझ सकें।

  • आगामी योजनाएं:
    • और अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन।
    • स्थानीय किसानों और कारीगरों को जोड़ने के प्रयास।

निष्कर्ष
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बना यह कृषि-पर्यटन केंद्र न केवल हरियाणा की कृषि प्रगति को प्रदर्शित करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए भी एक मजबूत कदम है।
हरियाणवी संस्कृति, प्राचीन कृषि तकनीक और आधुनिक विज्ञान के समागम का यह केंद्र आने वाले समय में पर्यटकों और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *