भारतीय जाट विकास मंच द्वारा मुख्यमंत्री से उठाई गई थी मांग, मुख्यमंत्री ने 15 दिन के भीतर की मांग पूरी
सिरसा, 12 जनवरी। अब अन्य महापुरुषों की तरह हिंदू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल की जीवनी भी हरियाणा स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होगी।
इसके लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी द्वारा सहमति जताते हुए पत्र जारी कर दिया है। पत्र जारी होने के बाद भारतीय जाट विकास मंच के सदस्यों ने खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया है।
दरअसल 24 दिसंबर 2024 को भारतीय जाट विकास मंच के बैनर तले हिंदू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल के बलिदान दिवस पर गांव फूलकां में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा और राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने विशेष रूप से शिरकत की थी।
इस दौरान भारतीय जाट विकास मंच की तरफ से व महाराजा सूरजमल के वंशज डॉ नरेंद्र सिंह ने सीएम नायब सिंह सैनी व शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के समक्ष जोरदार तरीके से मांग उठाई थी कि अन्य महापुरुषों की भांति हिंदू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल की जीवनी को भी स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। जिस पर सरकार ने मात्र 15 दिन में संज्ञान लिया है।
इस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महिपाल सिंह ढांडा व राज्य सांसद सुभाष बराला ने संज्ञान लेते हुए मांग को पूरा कर दिया है।
इस संबंध में सरकार के निर्देश के बाद हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी के सहायक सचिव (शैक्षिक) कृते सचिव की तरफ से भारतीय जाट विकास मंच के प्रधान डॉ. राजेंद्र कड़वासरा को जारी किए गए पत्र में बताया गया है कि आठवीं कक्षा के इतिहास विषय में हिंदू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल की जीवनी को शामिल कर लिया गया है
और 11वीं व 12वीं कक्षा के इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए एनसीईआरटी ही प्राधिकृत है इस लिए अगर एनसीईआरटी की तरफ से ही यह फैसला लिया जा सकता है। इस मांग को पूरा करने पर भारतीय जाट विकास के तमाम सदस्यों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व राज्यसभा सांसद सुभाष बराला का आभार प्रकट किया है।
महाराजा सूरजमल ने जीती थी 80 लड़ाइयां, एक भी युद्ध नहीं हारे
13 फरवरी 1707 को हिंदू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल का जन्म हुआ।
भरतपुर के राजा चूड़ामन सिंह के बाद उनके भतीजे बदन सिंह जोकी भरतपुर रियासत के राजा थे। उनको प्रतापी संतान प्राप्त हुई जो कि आगे चलकर एक महान, धीर-वीर और बलवान राजा बना जिसका नाम सूरजमल या सुजान था।
वह क्षत्रिय जाट था। 1755 में राजा बदन सिंह ने सूरजमल को राज्य की कमान सौंप दी थी क्योंकि उनकी आंखों की ज्योति कम होने लगी थी। सूरजमल के पिता बदन सिंह ने पुरानी गढ़ी पर लोहागढ़ दुर्ग बनाया।
उसने डिंग महलों का निर्माण करवाया और भरतपुर को राज्य की राजधानी बनाया। 1732 में जब वह 25 वर्ष के थे तो उनके पिता ने उनको सोघरिया रुस्तम पर विजय करने के लिए भेजा जिसको सूझबूझ से उन्होंने फतेह कर लिया। भरतपुर जहां था वह सोघरिया जाट रुस्तम के अधिकार में था सन 1733 में भरतपुर नगर की नींव डाली गई
महाराजा सूरजमल का साम्राज्य विस्तार
मराठा, राजपूतों और मुगलों के साथ-साथ इन्होंने राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, अलवर जिले, हरियाणा के गुडग़ांव, रोहतक, झज्जर, फरीदाबाद, रेवाड़ी, मेवात जिले, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के आगरा,
अलीगढ़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, हाथरस, एटा, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ जिले तक इनका एक विशाल भूखंड पर साम्राज्य था। सूरजमल ने अपने मजबूत क्षेत्रों में किले एवं महल बनवाए, जिसमें लोहागढ़ किला शामिल है।
मराठों के पतन के बाद महाराजा सूरजमल ने हाथरस, बनारस, मैनपुरी, फरुखनगर, आगरा, धौलपुर, गाजियाबाद, झज्जर, रोहतक आदि इलाकों को फतह कर लिया था। 25 दिसंबर 1763 ई. को मुगलों ने धोखे से घात लगाकर महान योद्धा की हिंडन नदी के तट पर नवाब नजीबुद्दौला के साथ युद्ध में सूरजमल की हत्या कर दी गई।
उसके एक साल बाद ही सूरजमल के पुत्र जवाहर सिंह ने बदला लेकर लाल किले को जीत लिया। महाराजा सूरजमल की स्मृति में 25 दिसंबर को हर वर्ष सूरजमल बलिदान दिवस मनाया है।
हिंदू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल के बारे में कहावत है कि राजा झुके, झुके मुगल अंग्रेज, झुका गगन सारा। सारे जहां के शीश झुके, झुका न कभी सूरज हमारा।
