भारत-पाकिस्तान समेत एशिया के कई देशों में इंटरनेट स्पीड हुई धीमी
इंटरनेट सेवाओं में बड़ी रुकावट
नई दिल्ली। एशिया के कई देशों में रविवार को अचानक इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गईं। भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य देशों में इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या लाल सागर (Red Sea) में समुद्र के नीचे बिछी केबल कटने की वजह से उत्पन्न हुई।
किन देशों पर पड़ा असर?
- भारत
- पाकिस्तान
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात (दुबई और अबू धाबी समेत)
- दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश
- पश्चिम एशिया और यूरोप से जुड़ी इंटरनेट लाइनें

यह समस्या मुख्य रूप से SMW4 (South East Asia-Middle East-Western Europe 4) और IMEWE (India-Middle East-Western Europe) केबल सिस्टम में तकनीकी खराबी से जुड़ी है।
नेटब्लॉक्स की रिपोर्ट
इंटरनेट कनेक्टिविटी पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था NetBlocks ने जानकारी दी कि लाल सागर में कई अंडरसी केबल कटने की वजह से यह समस्या उत्पन्न हुई है।
- भारत और पाकिस्तान में लाखों यूजर्स ने धीमी इंटरनेट स्पीड की शिकायत की।
- सऊदी अरब के जेद्दा (Jeddah) के पास यह बड़ी तकनीकी खराबी दर्ज की गई।
- इस घटना का असर इंटरनेशनल इंटरनेट ट्रैफिक पर भी पड़ा।
कंपनियों पर पड़ा प्रभाव
टाटा कम्युनिकेशंस
- SMW4 केबल भारत की कंपनी टाटा कम्युनिकेशंस की ओर से संचालित होती है।
- यह एक बड़े भारतीय समूह का हिस्सा है।
- कंपनी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
अल्काटेल-लूसेंट और IMEWE
- IMEWE केबल सिस्टम को कई देशों के कंसोर्टियम द्वारा संचालित किया जाता है।
- इस सिस्टम की निगरानी Alcatel-Lucent कंपनी करती है।
- तकनीकी खराबी से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
दुबई और अबू धाबी में इंटरनेट संकट
संयुक्त अरब अमीरात में भी इंटरनेट यूजर्स ने धीमी स्पीड और सेवा बाधित होने की शिकायत की।
- वहां की सरकारी कंपनियां Du और Etisalat सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं।
- यूएई सरकार ने इस समस्या पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।
माइक्रोसॉफ्ट की चेतावनी
टेक दिग्गज Microsoft ने अपनी वेबसाइट पर स्टेटस अपडेट में कहा कि –
- पश्चिम एशिया (Middle East) में इंटरनेट ट्रैफिक धीमा हो सकता है।
- रेड सी (Red Sea) में केबल कटने की वजह से यह समस्या उत्पन्न हुई।
- जिन सर्विसेज का ट्रैफिक पश्चिम एशिया से नहीं गुजरता, उन पर असर नहीं पड़ा।
हूती विद्रोहियों पर शक

इस घटना के पीछे यमन के हूती विद्रोही (Houthi Rebels) पर शक जताया जा रहा है।
- हूती विद्रोही पहले भी इजराइल पर दबाव बनाने के लिए इस तरह की धमकी दे चुके हैं।
- उनका मकसद गाजा पट्टी में चल रहे इजराइल-हमास युद्ध को खत्म करने का दबाव बनाना बताया जा रहा है।
- हालांकि, हूती विद्रोहियों ने पहले समुद्री केबल पर हमले करने से इनकार किया था।
2024 की घटना
- यमन की निर्वासित सरकार ने आरोप लगाया था कि हूती विद्रोही समुद्र के नीचे केबल काटने की योजना बना रहे हैं।
- उस समय भी कई केबल कट गई थीं।
- विद्रोहियों ने जिम्मेदारी से इनकार किया था, लेकिन अब इस नई घटना से शक और गहरा गया है।
इंटरनेट सेवाओं पर असर: आम यूजर्स की मुश्किलें
इस केबल कटने से एशिया के लाखों इंटरनेट उपभोक्ता प्रभावित हुए।
- धीमी डाउनलोड और अपलोड स्पीड
- वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन मीटिंग्स में दिक्कत
- ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट्स में समस्या
- OTT प्लेटफॉर्म्स और गेमिंग सेवाओं पर असर
विशेषज्ञों की राय
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि –
- समुद्र के नीचे बिछी केबलें (Submarine Cables) ग्लोबल इंटरनेट कनेक्टिविटी की रीढ़ होती हैं।
- किसी भी देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था इन पर निर्भर करती है।
- अगर ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहीं तो साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों पर गहरा असर पड़ेगा।
कब तक सुधरेगी स्थिति?
हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इंटरनेट सेवाएं कब तक सामान्य होंगी।
- मरम्मत कार्य शुरू होने की पुष्टि नहीं हुई है।
- प्रभावित कंपनियों और सरकारों की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है।
निष्कर्ष
लाल सागर में समुद्र के नीचे केबल कटने से भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब, दुबई और कई एशियाई देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि दुनिया की डिजिटल व्यवस्था कितनी हद तक अंडरसी केबल नेटवर्क पर निर्भर है। अगर मरम्मत जल्दी नहीं हुई तो व्यापार, संचार और डिजिटल सेवाओं पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

