भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से प्याज के निर्यात पर लगे 20% शुल्क को हटाने का निर्णय लिया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा लिया गया यह निर्णय किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों को संतुलित करने के उद्देश्य से किया गया है।
यह शुल्क 13 सितंबर 2024 को घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता को बनाए रखने और कीमतों में अस्थिरता को रोकने के लिए लगाया गया था।
प्याज निर्यात शुल्क हटाने का निर्णय क्यों लिया गया?

सरकार के इस फैसले के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें मुख्य रूप से घरेलू बाजार में प्याज की बढ़ती उपलब्धता और किसानों के हितों की सुरक्षा शामिल है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया।
1. घरेलू आपूर्ति में वृद्धि
रबी फसल की ताजा आवक के कारण घरेलू बाजार में प्याज की आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ी हुई आपूर्ति के कारण प्याज की कीमतों में स्थिरता आई है, जिससे सरकार को निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने का अवसर मिला है।
2. किसानों को उचित मूल्य दिलाने का प्रयास
पिछले कुछ महीनों से प्याज किसानों को अपनी उपज के लिए उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था। निर्यात प्रतिबंधों के कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमतों पर बेचनी पड़ी। शुल्क हटाने से किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिलेगी और उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा।
3. भारतीय प्याज की वैश्विक मांग
भारतीय प्याज की मांग वैश्विक बाजारों में हमेशा बनी रहती है। खासतौर पर बांग्लादेश, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और श्रीलंका जैसे देशों में भारतीय प्याज की मांग अधिक है। निर्यात शुल्क हटाने से भारत फिर से प्रमुख प्याज निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
4. उपभोक्ताओं के लिए स्थिर कीमतें
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्याज की कीमतें स्थिर बनी रहें और उपभोक्ताओं को अधिक मूल्य न चुकाना पड़े। मौजूदा समय में प्याज की कीमतें नियंत्रण में हैं, इसलिए निर्यात शुल्क हटाने का यह सही समय माना जा रहा है।
सरकार ने प्याज बाजार को स्थिर करने के लिए क्या कदम उठाए?
पिछले एक साल में सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

✅ न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) तय किया गया – सरकार ने निर्यात पर नियंत्रण रखने के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य तय किया ताकि प्याज की अत्यधिक विदेशी बिक्री को रोका जा सके।
✅ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया – प्याज निर्यात पर 8 दिसंबर 2023 से 3 मई 2024 तक लगभग पांच महीने तक पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया ताकि घरेलू बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
✅ कीमतों की निगरानी की गई – सरकार ने मंडियों और खुदरा बाजारों में प्याज की कीमतों की लगातार निगरानी की और आवश्यकतानुसार नीतिगत फैसले लिए।
प्याज निर्यात प्रतिबंध का असर
प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिली। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
📌 महाराष्ट्र के लासलगांव और पिंपलगांव मंडियों में प्याज की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
📌 21 मार्च 2025 को लासलगांव मंडी में प्याज की औसत कीमत ₹1,330 प्रति क्विंटल और पिंपलगांव में ₹1,325 प्रति क्विंटल रही।
📌 रबी फसल की अच्छी आवक से थोक और खुदरा बाजारों में प्याज की कीमतें नरम बनी हुई हैं।
निर्यात शुल्क हटने से क्या होंगे फायदे?
1️⃣ किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे – अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिलने से किसानों को अपनी उपज के लिए अधिक मूल्य प्राप्त होगा।
2️⃣ प्याज निर्यात में वृद्धि होगी – निर्यात प्रतिबंधों के कारण भारत से प्याज की आपूर्ति में गिरावट आई थी, जो अब फिर से बढ़ने की उम्मीद है।
3️⃣ वैश्विक व्यापार संबंध मजबूत होंगे – जिन देशों को भारतीय प्याज की जरूरत थी, उनके साथ व्यापारिक संबंध बेहतर होंगे।
4️⃣ घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहेगी – प्याज की अच्छी आवक के कारण निर्यात शुल्क हटाने से भी घरेलू कीमतों में भारी उछाल की संभावना नहीं है।
प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव: एक नजर
पिछले एक साल में प्याज की कीमतों में कई बदलाव देखने को मिले:
📅 सितंबर 2024: सरकार ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 20% निर्यात शुल्क लगाया।
📅 दिसंबर 2023 – मई 2024: प्याज निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया।
📅 मार्च 2025: रबी प्याज की बढ़ती आवक से बाजार में स्थिरता आई।
क्या निर्यात शुल्क हटने से प्याज की कीमतें बढ़ेंगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात शुल्क हटने से प्याज की कीमतों में थोड़ी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मांग बढ़ेगी। हालांकि, घरेलू आपूर्ति पर्याप्त होने के कारण कीमतों में बहुत अधिक उछाल की संभावना नहीं है।
सरकार का यह निर्णय किसानों और व्यापारियों के लिए कितना फायदेमंद?

सरकार के इस फैसले से किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों को कई लाभ होंगे:
🌱 किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।
📈 निर्यात की मात्रा बढ़ने से व्यापारियों को फायदा होगा।
🤝 वैश्विक व्यापारिक संबंधों में सुधार होगा।
निष्कर्ष: सरकार का संतुलित कदम
1 अप्रैल 2025 से प्याज निर्यात पर 20% शुल्क हटाने का सरकार का निर्णय किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हित में लिया गया है। घरेलू आपूर्ति में वृद्धि, किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय किया गया है।
यह कदम भारत को फिर से एक प्रमुख प्याज निर्यातक देश के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा, जबकि घरेलू बाजार में भी स्थिरता बनी रहेगी।
सरकार बाजार पर लगातार नजर बनाए रखेगी ताकि कीमतों में अस्थिरता न आने पाए और उपभोक्ताओं को उचित दरों पर प्याज उपलब्ध होता रहे।