पंजाब में पशुपालन पर संकट
पंजाब के कई इलाकों में हाल ही में आई बाढ़ और लगातार बदलते मौसम ने पशुपालन को गहरा नुकसान पहुँचाया है। गाय और भैंस (Cow and Buffalo in Punjab) की स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। खेतों में चारागाह डूब जाने और पशुओं के चारे की कमी से किसान दोहरी मार झेल रहे हैं।
गाय-भैंसों की हालत बिगड़ी
गांवों में गाय और भैंसों (Punjab Cow Buffalo Condition) की हालत बेहद खराब बताई जा रही है।
- लगातार पानी भरे रहने से पशुओं को खुरपका-मुंहपका और बुखार जैसी बीमारियाँ लग रही हैं।
- कई पशु बीमार होकर बैठ गए हैं और दूध उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है।
- पशु चिकित्सालयों में लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

कितना नुकसान हुआ है?
सरकारी रिपोर्ट और किसान संगठनों के मुताबिक:
- पंजाब में अब तक हजारों गाय और भैंस प्रभावित हो चुकी हैं।
- दूध उत्पादन में लगभग 30 से 40% तक की गिरावट दर्ज की गई है।
- केवल लुधियाना, फरीदकोट और पटियाला जिलों में ही लगभग 2000 से ज्यादा पशु बीमार पाए गए हैं।
- चारे की कमी के कारण कई किसानों को अपने पशुओं को बेचने की नौबत आ गई है।
किसान की दोहरी मार – फसल और पशु दोनों पर संकट
पंजाब का किसान केवल फसलों पर ही नहीं, बल्कि दूध उत्पादन और पशुपालन से भी अपनी आजीविका चलाता है। इस समय किसान:
- बाढ़ में बर्बाद हुई फसल से दुखी हैं।
- पशुओं की बिगड़ती सेहत और दूध की कमी से भी परेशान हैं।
- बाजार में दूध की आपूर्ति घटने से दाम बढ़ने की आशंका है।
चारे और दवाइयों की भारी किल्लत
- बाढ़ और बारिश के कारण हरे चारे की फसल पूरी तरह डूब गई है।
- सूखा चारा (भूसा) और दाना महंगा हो गया है।
- दवाइयों और टीकाकरण की कमी से पशुओं की हालत और बिगड़ रही है।
- कई जगह किसान गाय-भैंसों को भूसे और पत्तों पर जिंदा रख रहे हैं।
दूध उत्पादन पर सीधा असर
पंजाब, जिसे दूध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य माना जाता है, वहां स्थिति काफी गंभीर हो गई है।
- किसान संगठनों के मुताबिक पंजाब में दैनिक दूध उत्पादन में 15 से 20 लाख लीटर की कमी आई है।
- डेयरी उद्योग पर सीधा असर पड़ा है और अमूल, वेरका जैसे ब्रांड प्रभावित हुए हैं।
- दूध की सप्लाई चेन टूटी है, जिससे उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही है।
पशुपालकों की मुश्किलें
पंजाब के किसानों का कहना है कि सरकार की तरफ से मदद अपर्याप्त है।
- प्रभावित क्षेत्रों में अभी तक पर्याप्त राहत सामग्री और पशु आहार नहीं पहुँचाया गया।
- पशु चिकित्सकों की टीम सभी इलाकों में नहीं पहुँच पा रही है।
- कई पशु खुले आसमान के नीचे खड़े हैं क्योंकि बाढ़ में उनके शेड बह गए।
प्रशासन की ओर से राहत कार्य
- पंजाब सरकार ने कई प्रभावित जिलों में पशु चिकित्सा कैंप लगाए हैं।
- बीमार गाय और भैंसों का मुफ्त इलाज किया जा रहा है।
- चारा वितरण केंद्र बनाए गए हैं ताकि किसानों को कुछ राहत मिल सके।
- जिलाधिकारी स्तर पर टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

किसानों की मांगें
किसान संगठनों और डेयरी संघों ने सरकार से अपील की है कि:
- प्रत्येक प्रभावित किसान को मुआवजा और मुफ्त चारा उपलब्ध कराया जाए।
- बीमार या मृत पशुओं का उचित मुआवजा तुरंत दिया जाए।
- दूध उत्पादकों को आर्थिक मदद दी जाए।
- गांवों में विशेष पशु स्वास्थ्य अभियान चलाया जाए।
विशेषज्ञों की राय
पशु चिकित्सक और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि:
- समय पर टीकाकरण और मेडिकल सुविधा मिलने पर नुकसान को कम किया जा सकता है।
- सरकार को आपदा प्रबंधन में पशुपालन को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
- किसानों को पशुपालन से संबंधित बीमा योजनाओं का लाभ दिया जाना चाहिए।
पंजाब की अर्थव्यवस्था पर असर
पंजाब में कृषि के बाद पशुपालन सबसे बड़ा व्यवसाय है। गाय और भैंसों से मिलने वाला दूध और उससे बनने वाले उत्पाद न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि दूसरे राज्यों में भी सप्लाई होते हैं।
- दूध उत्पादन घटने से दूध, दही, घी और पनीर के दाम बढ़ने की संभावना है।
- किसानों की आय में भारी गिरावट आएगी।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर होगा।
निष्कर्ष
पंजाब में गाय और भैंसों की हालत (Punjab Cow and Buffalo Condition) बेहद खराब है। बाढ़, बीमारियों और चारे की कमी ने पशुपालन को संकट में डाल दिया है। किसान दोहरी मार झेल रहे हैं—फसलें बर्बाद और पशु बीमार। दूध उत्पादन में गिरावट से डेयरी उद्योग और उपभोक्ता दोनों प्रभावित होंगे।
जरूरी है कि सरकार तुरंत राहत पैकेज की घोषणा करे और पशुपालकों की मदद के लिए आगे आए। समय रहते कदम न उठाए गए तो पंजाब का डेयरी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था लंबे समय तक इससे जूझती रहेगी।

