घग्गर पर डैम नहीं, सहायक नदी कौशल्या पर बना बांध
घग्गर नदी का नाम सुनते ही पंजाब और हरियाणा के लोगों को बाढ़ के डरावने मंजर याद आ जाते हैं। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, घग्गर नदी पर सीधे कोई डैम मौजूद नहीं है। हालांकि, इसकी सहायक नदी कौशल्या पर डैम बनाया गया है जो पंचकूला जिले के पिंजौर के पास स्थित है।
यही कारण है कि जब भी भारी बारिश होती है, घग्गर का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और पंजाब-हरियाणा के कई इलाकों में तबाही मच जाती है।

1852 से 2023 तक घग्गर में 18 बार बाढ़ का प्रकोप
पिछले 173 वर्षों में 18 बार बाढ़ आई है जिसने लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया। रिपोर्ट्स के अनुसार इन वर्षों में बाढ़ दर्ज की गई:
- 1852
- 1887
- 1888
- 1976
- 1981
- 1984
- 1988
- 1993
- 1994
- 1995
- 1996
- 1997
- 2000
- 2001
- 2004
- 2010
- 2015
- 2023
हर बार घग्गर नदी का उफान दोनों राज्यों के गांवों, कस्बों और शहरों के लिए संकट लेकर आया।
1993, 1995 और 2010: जब 40 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आया
इतिहास गवाह है कि घग्गर नदी ने कई बार अपना रौद्र रूप दिखाया।
- 1993 में नदी में 40,763 क्यूसेक पानी आया। पानी सिरसा शहर तक पहुंच गया और हालात बिगड़ गए।
- 1995 में 40,313 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया, जिससे भारी तबाही हुई।
- 2010 में घग्गर का जलस्तर 40 हजार क्यूसेक पार कर गया। इस बाढ़ ने अंबाला से लेकर सिरसा तक कहर बरपाया।
इस भीषण तबाही के बाद सिरसा के ओटू गांव के पास ओटू वियर बनाया गया। इससे बाढ़ के खतरे को कुछ हद तक नियंत्रित किया गया क्योंकि यहां से लगभग एक दर्जन नहरें निकलती हैं।
2010: सबसे भयावह बाढ़, 7 लाख आबादी प्रभावित
घग्गर नदी की अब तक की सबसे बड़ी और खतरनाक बाढ़ साल 2010 में दर्ज की गई।
- पंजाब के 763 गांव प्रभावित हुए।
- हरियाणा के 5 जिलों के करीब 600 गांव डूब में आए।
- दोनों राज्यों की 7 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आई।
- लगभग 6 लाख एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं।
- इस आपदा में 51 लोगों की मौत भी हुई।
यह बाढ़ इतिहास में दर्ज सबसे भयावह आपदाओं में गिनी जाती है, जिसने पंजाब-हरियाणा की अर्थव्यवस्था और लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला।
क्यों आती है बार-बार घग्गर में बाढ़?
विशेषज्ञों के अनुसार, घग्गर नदी में बार-बार बाढ़ आने के पीछे कई कारण हैं:
- प्राकृतिक जलनिकासी की कमी – नदी का बहाव अवरुद्ध हो जाता है।
- बढ़ता शहरीकरण और खेती – नदी किनारे कब्जों और निर्माण कार्य से पानी का फैलाव बढ़ जाता है।
- डैम की अनुपस्थिति – घग्गर नदी पर कोई स्थायी डैम नहीं है।
- अत्यधिक बारिश – मानसून के दौरान ज्यादा बारिश से नदी उफान पर आ जाती है।
ओटू वियर और नहर प्रणाली से मिला आंशिक समाधान

सिरसा के पास ओटू वियर बनने के बाद स्थिति में कुछ सुधार जरूर आया है। यहां से निकली नहरों ने नदी के दबाव को कम किया। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल अस्थायी समाधान है। जब तक घग्गर पर कोई बड़ा बांध या जल प्रबंधन परियोजना नहीं बनाई जाती, तब तक बाढ़ का खतरा बना रहेगा।
बाढ़ से होने वाला नुकसान
हर बार आई बाढ़ ने पंजाब और हरियाणा को गहरी चोट दी है।
- फसलों का नुकसान – लाखों एकड़ जमीन पर खड़ी धान, कपास और गेंहू जैसी फसलें बर्बाद हो जाती हैं।
- पशुधन की हानि – हजारों गाय-भैंसें और अन्य पशु डूबकर मर जाते हैं।
- आर्थिक क्षति – किसानों को कर्ज और नुकसान का सामना करना पड़ता है।
- जनहानि – कई बार लोगों की जान चली जाती है।
बाढ़ प्रबंधन की चुनौतियां
पंजाब और हरियाणा सरकारों के लिए घग्गर नदी का बाढ़ प्रबंधन हमेशा चुनौती रहा है।
- स्थायी डैम की योजना पर कई बार चर्चा हुई, लेकिन जमीन अधिग्रहण और फंडिंग जैसी दिक्कतों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
- नहरों की सफाई और चौड़ीकरण का काम नियमित रूप से नहीं हो पाता।
- स्थानीय प्रशासन की तैयारी कई बार कमजोर साबित होती है।
घग्गर बाढ़ से बचाव के लिए जरूरी कदम
विशेषज्ञ और किसान संगठनों का मानना है कि अगर सही कदम उठाए जाएं तो घग्गर नदी से होने वाली तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता है।
- नदी पर बड़ा डैम और बैराज बनाया जाए।
- नहरों और नालों का चौड़ीकरण किया जाए।
- हर साल मानसून से पहले सफाई अभियान चलाया जाए।
- जल संरक्षण तकनीक अपनाई जाए।
- गांवों और कस्बों में आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाए।
नतीजा: घग्गर अब भी बड़ा खतरा
इतिहास से साफ है कि घग्गर नदी बार-बार बाढ़ के रूप में अपना प्रकोप दिखाती रही है। 1852 से लेकर 2023 तक 18 बार आई बाढ़ ने पंजाब और हरियाणा की तस्वीर बदल दी।
2010 की भयावह बाढ़ ने साबित कर दिया कि बिना मजबूत बाढ़ प्रबंधन और डैम निर्माण के इस खतरे से बचना मुश्किल है। आने वाले समय में अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो घग्गर नदी फिर से लाखों लोगों के लिए संकट बन सकती है।

