मासूम गुरफतेह का बड़ा कदम
प्रकृति की आपदाओं के बीच जब लोग अपना सबकुछ खो बैठते हैं, तब समाज में कुछ ऐसे मासूम दिल भी सामने आते हैं जो अपनी नन्ही उम्र में बड़ा उदाहरण पेश करते हैं। पंजाब के 10 साल के गुरफतेह सिंह ने ऐसा ही एक अनोखा काम कर दिखाया। उन्होंने अपने वर्षों से संजोए हुए पैसों वाली गुल्लक को तोड़कर बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दान कर दिया।
गुरफतेह का यह कदम न केवल इंसानियत की मिसाल है बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि मदद के लिए उम्र नहीं, बल्कि दिल बड़ा होना चाहिए।

बाढ़ की तबाही और पीड़ितों की स्थिति
पंजाब और आसपास के इलाकों में हाल ही में आई बाढ़ ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है।
- खेतों में खड़ी फसलें तबाह हो गईं
- घरों में पानी भर गया
- पशुधन का भारी नुकसान हुआ
- कई गांवों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया
इन हालातों में जब हर कोई अपनी-अपनी तरह से मदद करने की कोशिश कर रहा है, वहीं एक छोटे से बच्चे की गुल्लक तोड़कर किया गया योगदान सबके दिलों को छू रहा है।
गुल्लक में था बचपन का खजाना
गुरफतेह ने पिछले कई सालों से अपनी जेब खर्च और रिश्तेदारों से मिले पैसों को गुल्लक में जमा किया था।
- इस गुल्लक में हजारों रुपये इकट्ठा हो चुके थे
- गुरफतेह इन पैसों को किसी खास काम में लगाना चाहते थे
- लेकिन जब उन्होंने टीवी और अखबारों में बाढ़ पीड़ितों की तस्वीरें देखीं तो उनका मन पिघल गया
बचपन की मासूमियत और संवेदनशीलता ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया कि गुल्लक का पैसा जरूरतमंदों के काम आना चाहिए।
परिवार का सहयोग और गर्व
गुरफतेह के इस फैसले में उनके परिवार ने भी पूरा साथ दिया।
- माता-पिता ने बेटे की सोच की सराहना की
- दादा-दादी ने इसे परिवार के संस्कारों का नतीजा बताया
- पूरे गांव ने गुरफतेह को सलाम किया
परिवार का कहना है कि बच्चे की इस पहल ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है और यह दिखाया है कि इंसानियत की भावना बचपन से ही सीखी जा सकती है।
समाज में फैला संदेश
गुरफतेह का यह कदम अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है।
- सोशल मीडिया पर लोग उनकी सराहना कर रहे हैं
- गांव के अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिल रही है
- स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल को सराहा है
यह घटना यह साबित करती है कि मदद के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि सच्चे इरादों की जरूरत होती है।
बच्चों की सोच बदल रही तस्वीर
आज के समय में जहां बच्चे गैजेट्स और मनोरंजन में खोए रहते हैं, वहीं गुरफतेह जैसे बच्चे समाज की सोच बदल रहे हैं।
- उन्होंने दिखाया कि दया और सहयोग सबसे बड़ा धर्म है
- उनकी पहल से दूसरे बच्चों को भी दान और सेवा की प्रेरणा मिल सकती है
- यह समाज को बेहतर दिशा में ले जाने वाला कदम है

प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
गुरफतेह की गुल्लक तोड़कर मदद करने की खबर जब प्रशासन तक पहुंची तो अधिकारियों ने भी बच्चे से मुलाकात की और उसकी सराहना की।
- जिला प्रशासन ने गुरफतेह को सम्मानित करने का निर्णय लिया
- सरकार ने भी बच्चों और युवाओं को ऐसे उदाहरणों से प्रेरणा लेने की बात कही
- अधिकारी मानते हैं कि ऐसे कदम समाज की एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं
बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद के अन्य प्रयास
गुरफतेह की तरह कई संस्थाएं और समाजसेवी भी राहत कार्य में जुटे हुए हैं।
- गुरुद्वारे और मंदिरों में लंगर चल रहे हैं
- स्वयंसेवी संगठन दवाइयां और कपड़े बांट रहे हैं
- कई राज्यों से राहत सामग्री भेजी जा रही है
लेकिन एक बच्चे की गुल्लक ने जितनी गहरी छाप छोड़ी है, उतनी शायद बड़े-बड़े दानदाताओं की मदद भी नहीं छोड़ पाई।
मानवता का सबसे सुंदर रूप
गुरफतेह का यह छोटा-सा कदम हमें यह सिखाता है कि:
- इंसानियत के लिए कोई उम्र छोटी नहीं होती
- छोटी-सी मदद भी किसी की जिंदगी बदल सकती है
- बच्चों को दान और सहयोग की शिक्षा देना जरूरी है
उनकी गुल्लक का टूटना दरअसल मानवता की जीत है।
निष्कर्ष: मासूम दिल, बड़ा योगदान
10 साल के गुरफतेह की यह पहल पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने यह दिखा दिया कि असली अमीरी पैसों में नहीं, बल्कि दूसरों की मदद करने की भावना में है।

